Friday, April 5, 2013

दामिनी


थी, बो एक दामिनी

काली घटा मैं, आयी बो ऐसे

कि किसी, और का दामन ना उतरे

साथ उसके कई दामनिया चमक उठी

काश ! कुछ देर और रहे उजाला !

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